मंगलवार, 14 अप्रैल 2026

बोकड़िया गौत्र की उत्पत्ति का एक मात्र कारण : जीवदया

बोकड़िया गौत्र के उद्भव से "जीवदया" का सीधा कारण………

क्षत्रिय जाति से जैन-दर्शन अंगीकार करने का एक मात्र कारण जीव-अनुकम्पा रहा। न कोई चमत्कार न किसी विपत्ति के निवारण का प्रयोजन।प्रथम शिकार स्वरुप अनावश्यक हिंसा से निवृति पाने के लिए एवं  दूसरी बार लाखों जीवों की हत्या की सम्भावना से अनुकम्पा काज। कोई अतिश्योक्ति नहीं, कोई मुर्दा के जीवित होने आदि के चमत्कार का प्रपंच नहीं………

1- जैन प्रतिबोध :-
शिकार करते हुए चौहान वंशीय राजा सामंतसिंह को आचार्य जयदेवसूरि ने जीवहिंसा से निवृति का उपदेश दिया। आचार्य ने पापकारी सात व्यसनो के बारे में राजा को विस्तार से बताया। शिकार उन व्यसनों में से एक है। जीवों के प्रति अनुकम्पा से द्रवित होकर राजा ने जैन धर्म अपनाया। सात व्यसनों के  त्याग से व्रतधारी श्रावकधर्म में प्रवेश हुआ।

2 - बोकड़िया गौत्र स्थापना :-
वध के लिए लाए गए लाखों बकरों को श्री देवधर जी ने अभयदान दिलवाया। इसी घटना के परिणाम स्वरूप बोकड़िया गौत्र की स्थापना हुई।

अभयदान श्रेष्ठ दान
अहिंसा परमो धर्मः
जीवदया ही धर्म है।

- हंसराज बोकड़िया

बोकड़िया गोत्र के शिलालेख

बोकड़िया गौत्र के कतिपय शिलालेख (प्रतिमा लेख), जिसमें बोकड़िया गौत्र का उल्लेख है

(१) सं १४५८ वर्षे वैशाख वदि २  बुधे, उपकेश ज्ञातीय बोकड़िया गोत्रे, सा०  ……भा०  रूदी, पु०  जेसल भा०  जसमादे पित्रोः श्रे०  श्री पद्मप्रभस्वामि बिंब का०  रामसेनिय श्री धनदेवसूरि पट्टे श्री धर्मदेवसीरिभिः॥

( नागोर बड़ा मन्दिर, पद्मप्रभस्वामि प्रतिमा पर लेख, 'प्रतिष्ठा लेख संग्रह', लेखांक १८२ विनयसागर एवं 'जैन लेख संग्रह', लेखांक 1236  नाहर)

(२) सं० १५०४ वर्षे ज्येष्ठ वदि ३ सोमे उप० ज्ञा० बोकड़िया गोत्र सा० पाल्हा भा० पाल्हणदे पु० झासा भा० जासलदे पुत्र जातेन आत्मश्रेयसे श्री सुविधिनाथ बिंब का० प्र० वृहद्गच्छे भ० श्री धर्मचन्द्रसूरि पट्टे भ० श्री मलयचन्द्रसूरिभिः॥

( सुविधिनाथ प्रतिमा पर लेख, 'बीकानेर जैन लेख संग्रह', लेखांक १३२० अगरचन्द नाहटा)

(३) सं १५६२ व० माघ सु० १५ गु० उ० बोकड़िया गोत्रे सा० जेसा भा० जसमादे, पु० राणा भा० पूर्णदे, पु० अङ्गपाल  तेजा आ० श्रे० श्रेयांस बिं० कारि० बोकड़ियागच्छे श्री मलयचन्द्रसूरि पट्टे मुणिचन्द्रसूरिभिः॥

( जयपुर सुपार्श्वनाथ पंचायती बड़ा मन्दिर, श्रेयांसनाथ प्रतिमा पर लेख, 'प्रतिष्ठा लेख संग्रह', लेखांक ९१७  विनयसागर, जैन लेख संग्रह, लेखांक 1169 नाहर)

संकलन संपादन-  हंसराज बोकड़िया